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विद्यापतिधाम मंदिर परिसर में रील बनाना, वीडियो शूट करना सख्त मना है।
उगना महादेव मंदिर के कपाट प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक खुले रहते हैं।
प्रतिदिन सुबह और संध्या के समय होने वाली विशेष शिव आरती में अवश्य सम्मिलित हों।
कृपया मंदिर परिसर को स्वच्छ रखने में सहयोग करें, कूड़ा केवल निर्धारित कूड़ेदान में ही डालें।
पूरा मंदिर परिसर सीसीटीवी की निगरानी में है। अपनी कीमती वस्तुओं का ध्यान स्वयं रखें।
मंदिर विकास कोष में अंशदान केवल अधिकृत काउंटर या कार्यालय में रसीद प्राप्त कर ही जमा करें।
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जहाँ भक्ति के वश में
स्वयं महादेव चले आए

महाकवि विद्यापति की तपोभूमि और उगना महादेव की दिव्यता का साक्षी बनें। यहाँ का कण-कण साहित्य और शिव-भक्ति की गाथा गाता है।

जीवन परिचय

Mahakavi Vidyapati
१४वीं शताब्दी

महाकवि विद्यापति

मैथिल कोकिल एवं शिव भक्त

भारतीय साहित्य और संस्कृति के सूर्य, महाकवि विद्यापति न केवल एक महान कवि थे, बल्कि भगवान शिव के अनन्य भक्त भी थे। कहा जाता है कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं महादेव 'उगना' बनकर उनके घर चाकरी करने आए थे।

उनकी रचनाओं में भक्ति, श्रृंगार और लोक-व्यवहार का अद्भुत संगम मिलता है। आज भी उनकी पदावलियाँ मिथिला के घर-घर में गूंजती हैं।

जन्म स्थान
बिस्फी, मधुबनी
मुख्य भाषा
मैथिली, संस्कृत
आराध्य
भगवान शिव (उगना)

पवित्र स्थल

धाम परिसर के मुख्य आकर्षण

Ugna Mahadev Temple

विद्यापति उगना महादेव मंदिर

वह दिव्य स्थान जहाँ भगवान शिव ने कवि को अपनी सेवा दी। यहाँ जलाभिषेक का विशेष महत्व है।

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Vidyapati Smarak

विद्यापति स्मारक

महाकवि की प्रतिमा और उनसे जुड़ी स्मृतियाँ। यह स्थान साहित्य प्रेमियों के लिए तीर्थ समान है।

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Parisar

शिव गंगा सरोवर

मंदिर के निकट स्थित पवित्र सरोवर। यहाँ स्नान और ध्यान करने से मन को शांति मिलती है।

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