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महाकवि विद्यापति की तपोभूमि और उगना महादेव की दिव्यता का साक्षी बनें। यहाँ का कण-कण साहित्य और शिव-भक्ति की गाथा गाता है।
राजकीय विद्यापति महोत्सव 2026 के यादगार पल
भारतीय साहित्य और संस्कृति के सूर्य, महाकवि विद्यापति न केवल एक महान कवि थे, बल्कि भगवान शिव के अनन्य भक्त भी थे।
कहा जाता है कि उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं महादेव 'उगना' बनकर उनके घर चाकरी करने आए थे।
उनकी रचनाओं में भक्ति, श्रृंगार और लोक-व्यवहार का अद्भुत संगम मिलता है। आज भी उनकी पदावलियाँ मिथिला के घर-घर में गूंजती हैं।
धाम परिसर के मुख्य आकर्षण
वह दिव्य स्थान जहाँ भगवान शिव ने कवि को अपनी सेवा दी। यहाँ जलाभिषेक का विशेष महत्व है।
और पढ़ें →महाकवि की प्रतिमा और उनसे जुड़ी स्मृतियाँ। यह स्थान साहित्य प्रेमियों के लिए तीर्थ समान है।
इतिहास जानें →मंदिर के निकट स्थित पवित्र सरोवर। यहाँ स्नान और ध्यान करने से मन को शांति मिलती है।
महत्व जानें →उगना महादेव की कृपा और विद्यापति धाम की महिमा
"यहाँ आते ही मन को एक अद्भुत शांति मिलती है। उगना महादेव के दर्शन और प्रांगण की दिव्यता शब्दों में बयान नहीं की जा सकती। हर शिव भक्त को यहाँ एक बार जरूर आना चाहिए।"
राजेश कुमार
समस्तीपुर, बिहार
"साहित्य और आस्था का ऐसा संगम मैंने कहीं और नहीं देखा। महाकवि विद्यापति जी की स्मृति और भगवान शिव की कृपा इस स्थान को मिथिला का सबसे पावन तीर्थ बनाती है।"
नीरज मिश्रा
दरभंगा, बिहार
"शाम की आरती का दृश्य इतना मनमोहक होता है कि आप सब कुछ भूलकर शिव भक्ति में लीन हो जाते हैं। मंदिर परिसर की साफ-सफाई और व्यवस्था भी बहुत ही उत्तम है।"
अंजलि झा
पटना, बिहार
"जय जय भैरवि असुर भयावनि,
पशुपति भामिनि माया।
सहज सुमति वर दिअओ गोसाउनि,
अनुगति गति तुअ पाया।"